Saturday, 9 November 2024

ना ब्लाउज,ना बटन,ना काज तक 
वाह! रे! साहित्य आज तक 
हिंदी के छ्न्द,उर्दू के‌ मिसरे
फट गए 
कौन लिखेगा इतनी बेहयाई 

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