Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 3 November 2024
(परिंदे नही आए)
(परिंदे नही आये)
जो देश छोड़ गये थे,उनकी माँ मरी-----
पर वे बाशिंदे नही आये।
और तो और इस साल बगीचा भी सुना रहा-----------
क्युकि ऐ,रंग----हर मौसम जो आते थे-
वे परिंदे नही आये।
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