Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 12 July 2025
गजलों का बदन बेच दिया
(गज़लो का बदन बेच दिया)
एक गरीब शायर को-
भूख ने कुछ इस कदर तोड़ा,
कि ए "रंग"
उसने रोटी के लिये,
एक रईस को---
अपनी गज़लो का बदन बेच दिया.
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