Wednesday, 9 July 2025

(सावन चला गया)

(सावन चला गया)

झूले चले गये,कज़री चली गई,
मेहमान तो आते रहे गाँव मे लेकिन,
पर पहले जो आता था-
वे पाहून चला गया.

ऐ,"रंग"
धीरे-धीरे ये हादसा हुआ,
बारिश तो हुई लेकिन,
गाँव से मेरे सावन चला गया.

पाहून--मेहमान 

स्वरचित और अप्रकाशित है 

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जौनपुर 222002 (U P)

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