झूले चले गये,कज़री चली गई,
मेहमान तो आते रहे गाँव मे लेकिन,
पर पहले जो आता था-
वे पाहून चला गया.
ऐ,"रंग"
धीरे-धीरे ये हादसा हुआ,
बारिश तो हुई लेकिन,
गाँव से मेरे सावन चला गया.
पाहून--मेहमान
स्वरचित और अप्रकाशित है
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जौनपुर 222002 (U P)
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