जब तुम भीगे थे,मै भीगी थी
वे पहला सावन था।
सिहर के तेरे सीने से,
शर्मा के लिपटी थी
वे तेरी बाँहो का,मेरी बाँहो से-----
पहला सावन था।
तुमने होंठो पे रंखा था,होंठ मेरे
वे तेरी होंठो का,मेरी होंठो पे-----
पहला सावन था।
तुम बूँद-बूँद भीगे थे,
मै साँस-साँस भीगी थी----
वे तेरी साँसो का,मेरी साँसो से
पहला सावन था।
जब तुम भीगे थे,मै भीगी थी------
वे पहला सावन था।
###आज हमारे शहर के बरसात की रोमानियत है ये।
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