Saturday, 12 July 2025

दर्जन भर बच्चे हैं

विश्व जनसंख्या दिवस पे एक व्यंग्यात्मक कविता ।
                    (दर्जन भर बच्चे है) 
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्हीं के फजल से---------
तो दर्जन भर बच्चे है ।
कोई सुखी खाता है, 
तो कोई चटनी से रोटियाँ,
हाय! मेरे बच्चों के अब्बू की मोहब्बत, 
कि मर जाऊ,
इतनी मेरे मेकप और बादाम के खर्चे है.
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्ही के फजल से--------
तो दर्जन भर बच्चे है. 
अभी कल ही आई थी अस्पताल से समझाने ,
एक कलमुही मैम, 
मै बिगड़ गई उसी पे कि तु क्या जाने, 
मेरे बच्चे के अब्बू ----------
अभी भी मर्द अब्बल दर्जे है. 
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्ही के फजल से---------
तो दर्जन भर बच्चे है. 
वे कटोरे भर तेल की मालिश, 
और सैकड़ों दंड बैठक या अल्लाह, 
फिर उनका मेरा कनखियों से देखना, 
यू लगता है कि जैसे, 
मेरे पेट मे कुछ और बच्चे है.
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्ही के फजल से--------
तो दर्जन भर बच्चे है. 

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी ।
जज कालोनी, मियाँपुर 
जौनपुर---222002 (उत्तर प्रदेश) ।
no. no. 7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है ।

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