Friday, 15 May 2026

तरक्की

बड़ी तरक्की की 
हम घर बार छोड़ आए 
जब से हम हुए 
और हमारी फैमिली हुई 
तब से हम अपना परिवार छोड़ आए 

मां के ना रहने पर 
बड़ी भाभी 
अपने बेटे से ज्यादा मानती थी 
कभी शिकायत नहीं कि उसने 
कि लल्ला 
तुम अपनी भाभी की आंखों में इंतजार छोड़ आए 

भैया चुप रहे 
बस कर्ज लेते रहे 
खुद के बेटे का हिस्सा नहीं देखा 
मेरी काबिलियत 
कितनी बेवफा निकली 
कि हम उनकी उम्मीदों का 
हर उधार छोड़ आए.

हां फ्लैट में कैद हूं 
एक फोन आया था भाभी का 
कि लल्ला तेरे भैया नहीं रहे 
बड़ी इच्छा थी आ जाते
फिर दोनों तरफ 
एक मौन 
फ्लाइट पकड़ घर के बाहर खड़ा हुआ 
तो लगा कि भैया 
ने पूछा कैसे हो लल्ला 
फिर उनकी लाश से लिपट 
के बुदबुदा उठा 
देर कर दी भैया माफ करना 
अरे पगले 
माफी कैसी तू खुश हैं 
मैं खुश हूं 
क्या हुआ?












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