Sunday, 31 May 2026

स्तन सूदा औरतें

दिल्ली की एक पुरानी घटना जिसमें एक लड़की को चाकु और पत्थर से कुचकर मार दिया गया और उसकी इस सरे आम हो रही नृशंस हत्या को देखकर भी तमाम आते जाते हुए महिला और पुरुष उसकी बगल से ऐसे गुजर रहे थे कि जैसे उनकी बगल में कुछ हुआ ही ना हो, अगर कुछ हुआ भी हैं तो फालतू के पचड़े में क्या पड़ना या फिर इस सबसे उन्हें क्या मतलब?

लेकिन राजधानी दिल्ली के उस मुर्दापन को मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया ✍️✍️

(कुछ औरते गुजर रही)
😢😢😢😢

वे नृशंस चाकुओं से मार रहा,
पत्थर से कुचल रहा,
वही बगल से उसके 
कुछ स्तन शुदा औरते 
गुजर रही.
निर्भया
के गुप्तांग के सरिए से फिर 
खून बह रहा
लेकिन इस बार
मोमबत्तियां जली नही
चलो ! अच्छा है
कि, दिल्ली
का अपना मुर्दापन बच गया.
आखिर राजधानी है
यही तो आना है
कुछ लोगो को 
सदन में घड़ियाली आसूं बहाने
कुछ वोट
टटोलने,
लव जेहाद, हिंदू मुसलमान,जाति
नही, नही
फिर किसी लड़की का कटा स्तन
उछल रहा
और उसके गुप्तांग से
खून की एक पतली धार 
बह रही.
पता नही की राजधानी की तरफ
या फिर, हमारी सूख चुके
आंख के पानी की तरफ
लेकिन हां! कुछ
स्तन शुदा औरते 
उसकी बगल से गुजर रही. 😢😢😢😢

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

लेखक--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जौनपुर (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

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