आरक्षण-जातियो के आधार पे देना,
एक अभिशाप है साहब।
कुछ घर पंडितो और ठाकुरो के भी,
अब उदास है साहब।
कही बागी न बना दे-परदे के उस तरफ की भूख,
क्यूँकि उनकी जवान बिटियाँ के-----
तन पे भी अब आखिरी लिबास है साहब।
रहम!रहम!रहम!बख्श़िये,
हमारी वेदना भी अब----------
हरियाणा के आस-पास है साहब।
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