(नेपाल)
नेपाल,
तेरी आँखे किसी हिरनी सी,
आवाज कोयल की कूक
और बाँसुरी की तरह,
चेहरे पे तुम्हारी ये छुईमुई सी शर्म,
उफ! तु क्या जाने? कि तु--
कितनी खूबसूरत है.
नेपाल,
उसपे तेरी ये सफेद सफ्फाक सी सलवार,
और सीने पे
एक अल्लहड़ लड़की सी,
दुपट्टे का इधर-उधर फिसलना,
यूँँ लगता है कि जैसे तु--
किसी परी या अप्सरा की बेटी है.
नेपाल,
तु आज मेरे पूरे हो रहे इस नावेल की,
किताब के,
एक-एक शब्द में जिंदा रहोगी,
क्योंकि हमने तुम्हें देश की तरह नही,
अपनी मोहब्बत
और महबूबा की तरह देखा है.
यह कविता मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित है.
रचनाकार---रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com
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