Friday, 31 January 2020

व्यंग्य--(गढ़ायुक्त सड़क )

व्यंग्य----(गड्ढायुक्त सड़क )

गड्ढायुक्त सड़क का व्यंग्य साहित्य मे अपना एक उत्कृष्ट लालित्य है.इस गड्ढायुक्त सड़क का ये उबड़-खाबड़पन व्यंग्य की नायिका का उन्मादी यौवन है जो व्यंग्यकार को ललचाता है,अपने इस सौदर्य वर्णन के लिये. "ये लालच ही उसके व्यंग्य साहित्य का अलंकार है". ऐसी गड्ढायुक्त सड़को पे सवारी लादकर डग्गामार वाहन का जोर-जोर ध्वनि के साथ इधर-उधर हिचकोले की आवाज के साथ चलने की ध्वनि इस व्यंग्य साहित्य की शास्त्रियता है.

अखबारों मे लबालब प्रदुषित पानी से भरे इस गड्ढायुक्त सड़क पे एक पृष्ठ का लेख देकर इसकी रंगीनियत और रोमानियत का जो खाका ये पत्रकार अपनी अलोचना से तैयार करते है,वे व्यंग्य की जड़ में मट्ठा है. वरना ये विभिन्न कीट-पतंगो के नाना-प्रकार की ध्वनियां इस व्यंग्य लेख का वाद्ययंत्र है. जिसमे हम व्यंग्यकार तरह-तरह के तीक्ष्ण शब्दो से अलंकार रुपी गहने पहनाकर इसकी सुंदरता का मानवीय करण करते है.

इस गड्ढायुक्त सड़क के लिये वहा के फला-विधायक पे दोषारोपण करना ये व्यंग्य के सुंदरीकरण के नायक का अलौकिक अपमान है.जबकि ये विधायक हमारी व्यंग्य विधा के पुजनीय और आदरणीय है. क्योंकि ये गड्ढायुक्त सड़क इन्हें हमारे आपकी तरह घर नही अपितु सीधे विधान सभा ले जाती है. फिर ये तथाकथित हमारे व्यंग्य लेख के लिये गड्ढायुक्त सड़क मुहैया कराने वाले पुरोधा अगले पाँच वर्ष अपनी सुख और सुविधा के हनीमून का लुत्फ उठाते है.

अतः ये विधायक केवल विधायक नही अपितु ये हिन्दी व्यंग्य साहित्य के लालित्य है, जिनके कारण व्यंग्य विधा पुष्पित और पल्लवित है. भगवान करे ऐसे अन्य विधानसभा क्षेत्रो मे भी गड्ढायुक्त सड़कों की श्रीवृद्धि हो.जिससे हिन्दी साहित्य की व्यंग्य विधा विलुप्त प्राय न हो. जो भी इस श्रेष्ठ कार्य में अवरोध पैदा करे उन तथाकथित लोगो को हम परम व्यंग्य सिद्ध लेखको का ये राष्ट्रीय श्राप लगे कि वे चाहे जो हो जाये--"लेकिन वे कभी भी विधानसभा का विधायक होकर विधानसभा का मुँह न देखे".

यह व्यंग्य मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.

लेखक---रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
Mo.no.7800824758

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