आईये हम आप सभी अपने आस-पास के नगरो व महानगरों में अपने सद्कर्मो से बनी-"प्रदुषण की सिगरेट पीते है. ये वे सिगरेट नही जिसे विल्स या कैप्टन कहा जाता है, जो केवल अपने पीने वालो की साँसे व फेफड़े कमजोर करती है. ये प्रदुषण की सिगरेट वे बेहतरीन सिगरेट है,जिसके कश का जानलेवा धुआँँ कल पैदा हुये मासुम बच्चो की साँसो मे भी जा रहा.एक तरह से ये प्रदुषण का सिगरेट चाहे-अनचाहे सभी को पीना है.
इस प्रदुषण के सिगरेट की स्मोकिंग-" अब जीवन और मृत्यु के स्मोकिंग मे बदल गई है".हमारे चारो तरफ धुआँँ है,धुंध है और कहकहे लगाती,अट्हास करती प्रदुषण की ये हारर सुलगती सिगरेट है.हम पढ़े लिखे-"अंतिम श्रेणी के बेवकूफ" ये जानते हुये भी कि, ये प्रदुषण की सिगरेट एक दिन उसकी ही नही बल्कि उसके पुरे देश की संतति को नष्ट कर देगी फिर भी हम इसे पुष्पित व पल्लवित कर रहे.
आज इस प्रदुषण की सिगरेट के धुएं की वजह से हमारे देश की राजधानी दिल्ली को 32 हवाई उडा़नो के क्षेत्र को डाइवर्ट करना पड़ा. मार्निंग वाक करने वालो को रोका गया,बच्चों के स्कूल व कालेज बंद करने पड़े ,निर्माण आदि का कार्य रोका गया.कही आने जाने के लिये मास्क का सहारा लेना पड़ रहा. यानी-" अब प्रदुषण एक सिगरेट का धुँआ नही बल्कि हमारे इस देश के जीवन का आपातकाल बन गया है".
दिल्ली मे उच्च-स्तरीय बैठक इस सिगरेट के लिये करना ये अपने-आप में साबित करता है कि इससे-"इस देश के शरीर को क्षति पहुंच रही है" और अब इस प्रदुषण के सिगरेट का धुँआ हमारे चारो तरफ मृत्यु-नर्तन कर रहा.हम ही क्या और हमारा देश क्या पूरी दुनिया भी अपने देश की पूरी आबादी के लिये नशामुक्ति केन्द्र नही बनवा सकता.
अब तो इस सिगरेट के साथ जैसे हम एक कदम और अपने विध्वंस की तरफ बढ़ गये है.क्योंकि इसके धुएं के साथ ही,हम इसकी कागज़ पे रखकर अब अपने जीवन रुपी मृत्यु के हिरोइन का कश भी ले रहे.इसके सारे लक्षण स्पष्ट दिख रहे--"आँखो का लाल सुर्ख हो जाना,नाक से पानी आना,खाँसी आना,जी घबरना ये सारे महान लक्षण उसी प्रदुषण की सिगरेट के धुएं मे मिक्स इस हिरोइन के धुएँ का भी है".
कभी-कभी यहां-वहां खुजली, शरीर पे चकत्ते के निशान का कष्टदायी हो जाना भयावहता का कुरुप दर्शन है.ऐसा नही की ये केवल महानगरों मे ही है,नही इस प्रदुषण की सिगरेट का धुँआ हमारे आपके यहा भी है.यानी ये-"प्रदुषण की सिगरेट का धुआँ हर कही,हर जगह उतने ही नष्ट व हमें तबाह करने की मिज़ाज मे है" आईये हम और आप जीवन के खुशनुमा आसमान में इस धुंंए को नष्ट करने की तरफ बढ़े अन्यथा ये धुआँँ हमारे जीवन की होठो को काला व स्याह कर देगा.
यह लेख मेरा स्व-लिखित व अप्रकाशित है.
लेखक--रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
Mo.no.7800824758
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