यू तो 31 दिसंबर की रात भीषण ठंड से ठिठुरती हुई जश्न और हैप्पी न्यू ईयर की रात थी जिसमें राजेश के सभी दोस्त शामिल थे. उन्होंने इस जश्न में राजेश को भी शामिल करने के लिए बहुत प्रयास किया लेकिन राजेश ने अपने दोस्तों से साफ-साफ इस जश्न में शामिल होने से मना कर दिया हालांकि उससे उसके कुछ दोस्त नाराज भी हुए लेकिन राजेश ने इसकी कोई भी परवाह नहीं की.
और जब उसके सभी दोस्त नए साल को सेलिब्रेट. करने में पूरी तरह डूब गए, तो राजेश चुपचाप अपने घर से बाईक पर 15 कंबल लेकर बैठा और वे रेलवे स्टेशन और रोडवेज के फुटपाथ की तरफ चल पड़ा जहां पर इस भीषण ठंड में ठंड की वजह से कांप रहे असहाय और बेसहारा बूढ़ो को वे कंबल देकर हैप्पी न्यू ईयर कह रहा था.
14 कंबल इन बूढ़ो को देने के बाद जब राजेश ने अपना 15वां कंबल एक बूढ़े को देने के लिए हाथ बढ़ाया तभी आतिशबाजी की आवाज के साथ ही रोशनी की चकाचौंध से पूरा शहर नहा गया इसका मतलब था कि अब इस जश्न व पार्टी में एक दूसरे को हैप्पी न्यू ईयर कहने की शुरुआत हो गई थी.
लेकिन शहर की इस रोशनी के तले एक भयावह अंधेरा भी था, जिसे शहर की यह अय्याशी किसी भी कीमत पर हैप्पी न्यू ईयर नहीं कह सकती.जबकि इन्हीं में से कई बूढ़ो ने सिर्फ अपने बेटों के हैप्पी न्यू ईयर के लिए अपने तमाम हैप्पी न्यू ईयर कुर्बान कर दिये होंगे.
यह सोच राजेश के होठों पर एक टीस और पीड़ा भरी मुस्कान आई फिर वे घर की तरफ अपने बाइक से चल पड़ा और रास्ते भर ये गाना राजेश को हर चौराहे क्लब,और रेस्टोरेंट से सुनाई पड़ता रहा नए साल का पहला जाम, आपके नाम, बोलो-----हैप्पी न्यू ईयर.
यह लघुकथा मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.
लेखक---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर pin.no.222002 (U P )
Mo. no.7800824758
No comments:
Post a Comment