काव्या से मेरी शादी होने के कुछ ही महीने बाद एक दिन ऑफिस से लौटते समय मेरा रोड एक्सीडेंट हो गया.जिसमें मेरे दाहिने पैर की हड्डी टूटने के साथ ही कुछ गंभीर चोटे भी आई थी.
डॉक्टर ने मुझे देखने और मेंरे दाहिने टूटे हुए पैर में प्लास्टर चढ़ाने के साथ ही सख्त हिदायत देते हुए कहां की कम से कम तुम्हें 3 महीने कंप्लीट बेड रेस्ट करना होगा. डॉक्टर की बात सुनकर मुझे एक धक्का सा लगा.
क्योंकि मुंबई जैसे महानगर में मेरे और काव्या के अलावा, हमारे परिवार का कोई भी सदस्य यहां नहीं रहता था. अतः अस्पताल से अपने फ्लैट में आने के बाद,मैंने काव्या से कहा की काव्या अगर तुम कहो तो मैं गांव से किसी को यहां बुला लूं, ताकि तुम्हें कोई परेशानी ना हो.
मेरे इतना कहते ही काव्या की आंखों में आंसू आ गए शायद काव्या मेरे अंतर्मन के भाव को समझ गई और वह बोली की क्या एक पत्नी अपने पति का 3 महीने सेवा भी नहीं कर सकती, मैं काव्या के इस कथन से झेंप गया और मुझे थोड़ी सी आत्मग्लानि भी हुई. जिस को छिपाने के लिए मैंने काव्या के सामने अपने दोनों हाथों से कान पकड़ने के साथ ही सॉरी कहा.
तब कहीं जाकर काव्या के गुलाबी और खूबसूरत होठों पर मुस्कान आई, फिर काव्या की मोहब्बत और मेहनत की बदौलत मैं 3 महीने से पहले ही चलने फिरने लायक हो गया, और जब मैं पूर्णतः ठीक हो गया तो, काव्या के साथ कैंडल नाइट डिनर करने के लिए एक होटल में गया और वहां एक प्राइवेट केबिन बुक कराने के बाद वेटर को खाने और नाश्ते का आर्डर दे दिया जिसे लेकर वेटर केविन से बाहर चला गया.
इसके बाद मैंने काव्या से कहा कि जानती हो काव्या आज कौन सी तारीख और कौन सा दिन है,तो काव्या ने कहा जी मैं तो नहीं जानती. उसकी इस सादगी पर मैं बावला सा हो गया. लेकिन अपने आप को संयत करते हुए, मैंने कहा चलो कोई बात नहीं,बस तुम अपनी यह दोनों खूबसूरत आंखें कुछ देर के लिए बंद कर लो तो फिर मैं तुम्हें बताऊं कि आज कौन सी तारीख और कौन सा दिन है?
काव्या ने जब अपनी खूबसूरत आंखें मूंद ली तो मैंने एक नजर काव्या को देखा और फिर मैंने काव्या को अपनी खूबसूरत आंखें खोलने के लिए कहा, जब काव्या ने अपनी खूबसूरत आंखें खोली तो उसने मेज पर रखे हुए एक दिल के आकार के गुलाबी डिब्बे को देखा और उसे खोला,खोलने के बाद जब उसने उस डिब्बे में रखी हुई हीरे की अंगूठी को देखा तो वह बोली, कि आप ही इसे मेरी उंगली में पहना दीजिए.
मैंने काव्या की उंगली में अंगूठी पहनाते हुए कहा जानती हो काव्या, कि मैंने तुमसे क्यों पूछा था कि आज कौन सी तारीख?और कौन सा दिन है?.आज की तारीख '14 फरवरी है', जिसे सभी प्यार करने वाले और मोहब्बत करने वाले अपने दिल के जज्बात के इजहार का दिन भी कहते है यानि की वेलेंटाइन-डे ,और मैं भी आज तुमसे अपनी मोहब्बत का इजहार करता हूं, आई लव यू मेरी काव्या. क्योंकि एक्सीडेंट के बाद मै सही अर्थों में तुम्हें समझ और पहचान पाया, सच तुम मेरे लिए और मेरी जिंदगी के लिए एक पिंक खूबसूरत गुलाब हो, जिसे मैं ता जिंदगी, आई लव यू कहता रहू तब भी कम है.
यह कहानी मेरी स्वलिखत व अप्रकाशित है.
लेखक--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
mo. no.7800824758
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