वह शहर का सबसे प्रसिद्ध प्राइवेट हॉस्पिटल था, जिसकी सीढ़ियों तलक पर चमचमाते हुए संगमरमर के पत्थर लगे थे.उसी अस्पताल के अंदर एक औरत जो कि पहनावे से ही काफी गरीब लग रही थी,अपने बीमार बच्चे को दिखाने के लिए वहां के सभी कर्मचारियों से गिड़गिड़ा रही थी, लेकिन उन सभी के कानों पर जैसे जू तक नही रेंग रही थी, बल्कि वे सभी आपस में बाते करते हुए जोर-जोर से हंस रहे थे.
वह हिम्मत करती फिर उनसे कहती, उनसे गिड़गिड़ाती,कि भगवान के लिए एक बार मेंरे बच्चे को डॉक्टर साहब को बुलाकर दिखा दीजिए आप सब की मुझ गरीब पर बड़ी कृपा होगी.कई बार ऐसा करने पर वह सभी बोले, अरे जाओ! अभी डॉक्टर साहब के आने का टाइम नही हुआ है. ऐसा वे सभी उस औरत के चले जाने के लिए कह रहे थे, लेकिन जिस माँ का बच्चा बीमार हो वे माँ अपने बच्चे को बचाने की कोशिश भला कैसे छोड़ सकती है.
उसने भी यह कोशिश और उम्मीद नही छोड़ी. लेकिन शायद इस बार की उसकी कोशिश से अस्पताल के सारे स्टाप उससे झूझला गए और उस औरत को जबरदस्ती या बेरहमी से उस औरत का हाथ पकड़ा और अस्पताल के बाहर कुछ इस तरह धकेला कि वह औरत अपने बीमार बच्चे के साथ गिरते-गिरते बची.
फिर वह कुछ देर उस अस्पताल के चमचमाते पत्थर लगी सीढ़ियों के एक किनारे अपने बीमार बच्चे को लेकर बैठ गई. जैसे वह डॉक्टर के आ जाने का इंतजार कर रही हो. इसी उम्मीद में वह बीच-बीच में अपने बच्चे को देखती और धीरे-धीरे थपकती जैसे वह अपने बच्चे को समझा रही हो,कि बस बेटा थोड़ी देर और बर्दाश्त कर ले फिर तू एकदम भला चंगा हो जाएगा जबकि उसकी उस थपकी से उसके बच्चे के शरीर में कोई हरकत नही हो रही थी.
तभी उसकी कानों में डॉक्टर साहब आ गए, डॉक्टर साहब आ गए के का शोर सुनाई पड़ा, और इतना सुनते ही उसकी बुझी आँखों में जैसे अचानक कोई रौशनी आ गई हो. वह झट से उठकर अपने बच्चे को डॉक्टर को दिखाने के लिए ज्यो हि अपने बच्चे को उठाने का प्रयास करती है,तो उसके बच्चे के शरीर में कोई हरकत नही होती. वह औरत बहुत जोर से चिखती है और अपने बच्चे को लिए-लिए ही एक तरफ ढुलक जाती है.
और उस अस्पताल का पुरा स्टाप उस चिखने वाली औरत की तरफ दौड़ पड़ा, दौड़ने वालों में वह डॉक्टर भी शामिल था. लेकिन इन सभी ने दौड़ने में बहुत देर कर दी. काश! यह सभी लोग तब दौड़े होते जब यह औरत अपने बीमार बच्चे को डॉक्टर साहब से दिखाने के लिए इन सभी से गिड़गिड़ा रही थी, लेकिन अब वही डॉक्टर उस औरत और उसके बच्चे की नब्ज़ देखने के बाद बोला कि, यह दोनों मर चुके है, इनकी डेड बॉडी जल्दी से अस्पताल के सामने से हटवाओ, इतना कहकर डॉक्टर चला गया.
यह संवेदन हीनता महज़ एक शहर के अस्पताल या डॉक्टर की नही बल्कि देश के ना जाने कितने ऐसे प्राइवेट अस्पताल और डॉक्टर की है जिसके फर्श तलक महंगे संगमरमर के टाइल्स से चमक रहे है, लेकिन उन पत्थरो की सीढ़ियों पर हर महीने कोई ना कोई ऐसी मजबूर माँ अपने बच्चे को बचाने के लिए इन बेरहम लोगों के सामने गिड़गिड़ा रही होगी.
लेकिन उसे भी कुछ इसी बेरहमी के साथ अस्पताल के बाहर सीढ़ियों की तरफ धकेल दिया जाता होगा, और वहां का डॉक्टर बिल्कुल यहां के डॉक्टर की तरह नब्ज़ देखकर कह रहा होगा की दोनों मर गए है, इनकी डेड बॉडी जल्दि से अस्पताल के सामने से हटवा दिया जाए
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