इस बार की बरसात का पानी गिरा है,
धान की फसलो के यौवन शिखर पर।
वे देखो-------------
खेत में सिहरी खड़ी है एक बाला गाँव की,
उसका भीगा आँचल गिर गया है खेत में,
वे उठा के रख रही है जिस लोच से,
बरबस नयन थम जा रहे------------
धान की यौवन शिखर पर।
धान की ये बालियाँ खुद चाहती है,
कि खेत में आये पिया-------------
वे भी सुहागिन हो उठे बरसात में!
आँख मुँदे,साँस फूले,धान भीगे
दे बालियाँ!न्योता खुदी आँचल गिरा,
कि हे बादलो तुम खुब बरसो--------
अब मेरी यौवन शिखर पर।
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