Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 25 September 2022
(अज़नबी के साथ हूँ)
बिस्तर की सिलवटे---------
बिल्कुल खामोश है मेरी तरह।
वे जानती है कि मै-------
बस कहने को खाबिंद के साथ हूँ,,,,,,,,,
वरना ऐ,रंग----ये स्याह सच है---
कि मै एक बंद कमरे मे------
अज़नबी के साथ हूँ।
खाबिंद----पती।
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