Rangnath Dubey's Poems
Monday, 19 September 2022
( बंजारन )
मेरी जिंदगी में आई थी कभी,
एक खानाबदोश बंजारन.
उसकी कत्थई आंखों को याद कर,
मैं लिखता गया, लिखता गया
ना जाने कब,
एक मुकम्मल किताब बन गई,
ए रंग-------
वे खानाबदोश बंजारन.
@@@ रंगनाथ द्विवेदी
जिला जौनपुर, मोबाइल नंबर 7800824758
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