Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 10 January 2023
(माँ की लोरी रह जाती है)
माँ--------
मै ढ़ेरो खाता हूँ,
पर तेरी चुपड़ी रोटी की भुख रह जाती है।
आज सब कुछ है,,,,,,
स्लीपवेल के गद्दे एसी कमरे----
पर नींद घंटो नही आती है।
ऐ,रंग----यादो में----
माँ की गोद---------
और लोरी रह जा है।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment