मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल,
क्या शिला यही है कि दर्द ही मिले,
मैने तो दिल के अपने कैनवस पे तुमको--
खिचा है नया साल।
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
मैने ख्व़ाबो के घरौंदे को कितना सजाया,
पर वे भुले नही भुला,हमें जिनको भुलना था
उन्ही की याद मे तो शायद,
अपनी अश्क़ो से हमने यारो------
सिचा है नया साल।
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
मुझे मिली है दुरियाँ तोहफ़े मे इंतज़ार,
मै खड़ा हूँ अज़नबी सा हर कही,
मै जाऊं किधर?क्या पता?मंज़िल कहा?
लो नाम लेके उनका--------
मैने चिंखा है नया साल।
मेरा वज़ुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
पर गिला नही ऐ दुर के साथी,
मै तो कोसता हूँ बस अपनी मुकद्दर को,
बस तुमको खुश़ी मिले ऐ शरिके हयात मेरी--------------
और मुबारक हो नया साल।
@@@@@ये रचना देश की उपासना नामक पत्रिका मे मेरी 2006 मे प्रकाशित हुई थी।
आप सभी को नव वर्ष मंगलमय हो।
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