बेवफाई पे आज एक लम्बे अरसे के बाद, कुछ अलग लिखने की कोशिश की है,जिसे पढ़कर शायद आपको भी किसी की याद आ जाये "शनिवार के दिन ".
(शनिवार के दिन )
उठा था एक जनाजा, इसी शहर में
शनिवार के दिन.
वे आशिक,पागल, दीवाना था
जिसका दिल
बड़ी बेरहमी से तोड़ा था,
एक बेवफा ने. इसी शहर में----
शनिवार के दिन.
सुना है कि----
उसआशिक और पागल की,
आह! लगी थी उस बेवफ़ा को
इसी शहर में.
शनिवार के दिन.
तभी तो
वे जिस रइश के घर गई थी,
करके निकाह अपना,
उस रइश ने, उसे दिया तलाक
इसी शहर में-----
शनिवार के दिन.
वे बहुत तन्हा.
सिसकती रही महीनों.
फिर जाने क्या हुआ?
की उसने कर ली खुदकुशी,
अपने उसी दुपट्टे से,
जिस दुपट्टे में,
कभी देखा था
उसे उसके आशिक ने पहली मर्तबा
इसी शहर में-----
शनिवार के दिन.
@@यह रचना सर्वाधिकार सुरक्षित है अतः इसका बिना अनुमति लिए अंयन्त्र प्रयोग ना करें.
यह रचना अप्रकाशित है.
रचनाकार---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जौनपुर (U P )
mo. no.7800824758
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