Monday, 9 January 2023

(पुस की रात)

कहां कटती है,फटे कंम्बल से,
ऐ शहर गाँव मे,
पुस की रात.

हाड़ कपकपाती ठंड में 
कहां देख पाता है-शहर
खेत के किनारे पडे किसी-
किसान की लाश.

ये अखबार की बे-शरमी है,
"रंग-" वरना---
गाँव मे आज भी है,वही ठंड
और वही है
मुंशी प्रेमचंद के-
               पुस की रात.

@@@रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जौनपुर 222002 (U P )
Mo. no.7800824758

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