कहां कटती है,फटे कंम्बल से,
ऐ शहर गाँव मे,
पुस की रात.
हाड़ कपकपाती ठंड में
कहां देख पाता है-शहर
खेत के किनारे पडे किसी-
किसान की लाश.
ये अखबार की बे-शरमी है,
"रंग-" वरना---
गाँव मे आज भी है,वही ठंड
और वही है
मुंशी प्रेमचंद के-
पुस की रात.
@@@रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जौनपुर 222002 (U P )
Mo. no.7800824758
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