Saturday, 18 March 2023

(मुसलमान है, साहब)

ना ही , पूजा 
ना ही , किसी मस्जिद की ,
अजान है , साहब.

ये लड़की ,
इस दौर-ए-ग़ालिब की,
दीवान है , साहब.

बड़़े सलीके और 
तमीज़ से ,
लिखा है , कई रात ,
ये एक रात , हिन्दू
तो एक रात मेरी ,
गज़लों की , ----
मुसलमान है , साहब.

@ रंगनाथ द्विवेदी

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