इस सुंदरतम सृष्टि को आहूति----
डाल रही हूँ मै,,
दोज़ख मे अपने नन्हा सा-----
एक बच्चा पाल रही हूँ मै।
देगा मुझको अपना ही कोई गाली,,
ये नाज़ायज फिर भी ,रंग----
कुम्हार की मिट्टी सा-----
इसको ढ़ाल रही हूँ मै।
इस सुंदरतम,सृष्टि को आहूति डाल रही हूँ मै----
दोज़ख मे अपने नन्हा सा----
एक बच्चा पाल रही हूँ मै।
महिला दिवस पे मेरी लंबी कविता की शुरुआती लाईने।
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