Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 18 March 2023
(मज़हब हो के रह गई)
हर रात लहू-लूहान सेज़ पे सोती है,,,
इसका शौहर----
इसकी ख्व़ाहिशो का कत्ल़ करता है।
ये मोहब्ब़त तलाशती है कतरा-कतरा,,,
वे मोहब्ब़त के लम्हो मे तकरिर करता है।
ऐ,रंग--वे यहाँ आई थी औरत होने-----
मज़हब होके रह गई।
तकरिर--धार्मिक भाषण।
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