Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 7 March 2023
(खूबसुरत औरत नही देखी)
माथे पे चुह-चुहाता पसीना,
कमर पे खुशी साड़ी!
और सर पे सीमेंट की भदेली,
श्रम की मादक चाल!
ऐ,रंग---
मेरी कविता ने कभी--
इतनी खूबसुरत औरत नही देखी।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment