(मंदिर या मस्जिद के बगल से न ले जाना)
दोस्तो एक गुजारिश है कि,मेरी मईयत या लाश को-------
किसी भी मंदिर या मस्जिद के बगल से न ले जाना।
मै दिवाना हूँ,काफ़िर हूँ सुन लुंगा,
पर भगवान या अल्लाह के दर दोनो मे सर झुकाया है,
मुझे हिन्दू या मुसलमां बनके नही,
एै दोस्त आखिरी ख्व़ाहिश है,
कि मेरी मईयत को खुले मे रख देना,
चील,कौवे खायेंगे गम नही,
मगर एै दोस्त मेरी इस लाश को--------
एैसी किसी भी बस्ती से न ले जाना।
दोस्तोएक गुजारिश है कि मेरी मईयत या लाश को---
किसी भी मंदिर या मस्जिद के बगल से न ले जाना।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर (उत्तर--प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758
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