Saturday, 7 February 2026

नूतन

(साड़ी के आंचल को, दांतों से काटती है )

थोड़ी डरती,थोड़ी कांपती थी,
जब हमारी प्रेमिका 
कबूतर के गले में खत बांधती थी.

वह नूतन थी 
हमारे मोहब्बत की ,
जो बोलने से पहले 
शरमाती 
अपनी अंगूलियों से 
दुपट्टे को
लपेटती, छोड़ती 
और दांतों से काटती थी .

हमने शादी की है 
अपनी उसी नूतन से 
जो शादी के 
इतने सालों के बाद भी 
नहीं बदली ,
वह अब भी 
मेरी रोमांटिक बातों पर 
अपनी दांतों से दुपट्टे तो नही
लेकिन हां !
अब वह हौले-हौले 
अपनी साड़ी के आंचल को 
लपेटती, छोड़ती 
और दांतों से काटती है.♥️♥️

"आई लव यू मेरी नूतन" चित्र गुगल से साभार 

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियाँपुर 
जौनपुर--222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

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