थोड़ी डरती,थोड़ी कांपती थी,
जब हमारी प्रेमिका
कबूतर के गले में खत बांधती थी.
वह नूतन थी
हमारे मोहब्बत की ,
जो बोलने से पहले
शरमाती
अपनी अंगूलियों से
दुपट्टे को
लपेटती, छोड़ती
और दांतों से काटती थी .
हमने शादी की है
अपनी उसी नूतन से
जो शादी के
इतने सालों के बाद भी
नहीं बदली ,
वह अब भी
मेरी रोमांटिक बातों पर
अपनी दांतों से दुपट्टे तो नही
लेकिन हां !
अब वह हौले-हौले
अपनी साड़ी के आंचल को
लपेटती, छोड़ती
और दांतों से काटती है.♥️♥️
"आई लव यू मेरी नूतन" चित्र गुगल से साभार
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियाँपुर
जौनपुर--222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com
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