Thursday, 26 February 2026

(मिट्टी आ गई)

(मिट्टी आ गई)

फरिश्तों ने जो लिखी थी
वे चिट्ठी आ गई 
चल तेरे खाक में 
मिलने की मिट्टी आ गई.

ना रो दरख्तों पर,
ना शाख पर
यहां सबको टूटना है
बिछड़ना है
यही चलन है.

सभी ने देखा है 
कि खिजा के बाद
उन्ही महबूब 
दरख़्तों की शाख पर 
फिर से,
बहारों की 
नई पत्ती आ गई.

चल तेरे खाक में 
मिलने की मिट्टी आ गई.

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