Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 25 February 2026
उर्दू घुट घुट के परदे में रही
(उर्दू घुट-घुट के परदे मे रही)
मरदे तहज़ीब कत्ल करता रहा,
इसी से ऐ,रंग---सालो-साल,
हिन्दी अपनी पिड़ाओ के घुँघट मे,
और उर्दू----------
घुट-घुट के परदे मे रही।
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