ग़र तेरी कैद़ मे-----
ऐ पाक़ मेरा अभिनन्दन होगा,
तो क़सम वतन की खाते है,
लाहौर, करांची के हर घर मे-----
फिर भीषण क्रंदन होगा।
रूह कांप उठेगी हर शै़ की,
फिर गिद्ध-सियार ही बोलेंगे,
एक-एक बेटे के हिस्से----
कई-कई गर्दन होगा।
अगली आजादी का तिरंगा,
फहरेगा फिर ग़गन तेरे,
हम पैरो तले कुचल देंगे,
वहां तलक फिर. नक्शे मे ऐ"रंग'----
मेरा ये वतन होगा।
ग़र तेरी कै़द मे-----
ऐ पाक मेरा अभिनन्दन होगा।
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