Wednesday, 25 February 2026

कुछ पन्ने तो फटे होते

(कुछ पन्ने फटे होते)

सारा दिन
फुटपाथ पर बैठकर
एक भूखा शायर,
अपने लिखें दीवान को बेच नही पाया,

गर यही रात के अंधेरे में 
कोई औरत खड़ी होती,
तो ऐ "रंग"
उसकी जिस्म की दीवान के 
कुछ पन्ने फटे होते

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