Sunday, 22 March 2020

कविता--(आपके बिस्तर तक पुलिस है)

हनीप्रित को न पकड़ पाने वाली हमारे देश की महान पुलिस पे लिखा एक तिखा मगर सम-सामयिक व्यंग्य-----------------
                (आपके बिस्तर तक पुलिस है)
ठेला,खोमचा और रेहड़ी वालो के लिये--------
बड़ी हिंसक पुलिस है।
पर हनीप्रीत ने ये साबित कर दिया,
कि कुछ टुकड़े डालो,
और अपनी पहुँच का इस्तेमाल करो फिर देखो-------
कि कितनी नपुंसक पुलिस है।
ये बाइज्जत सब करते है,
इनकी कुत्तो से अच्छि नस्ल है,
कब कितने मे काटना और भौकना है,
सब जानते है!
सही किमत हो मालिक को काट लेंगे,
ये बड़े समझदार----------
और बड़ी हित-चिंतक पुलिस है।
मालिश-मशाज़,
ये खुद करवाने मे सक्षम है,
इनकी जानकारी में ढ़ेरो प्रीत है,
क्या आशाराम?, क्या राम-रहिम?
पैसे खरचिये तो,
महज़ डेरे तक नही बल्कि एै "रंग"------
आपके बिस्तर तक पुलिस है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)।

mo.no.----7800824758


यह रचना मेरी स्व-रचित व अप्रकाशित है।

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