मैं दर्जनों ऐसे मूर्ख दिवस के कालिदास से मिल चुका हूं, जिनकी बुद्धि का सरवर या नेटवर्क उनकी डिजिटल पत्नी ने ध्वस्त कर रखा है. ये मूर्ख दिवस के कालिदास है इन्ही मुर्ख व महान कालिदास में से एक हम भी है.हमारी ये कलयुगी पत्नियां अपनी खूबसूरती के लैब को हमारी सेवा की थेरेपी से अति सुंदर रखने के लिए हम कालिदासो से वे नौकरो से भी ज्यादा निम्न स्तर के काम लेती है. बस कभी-कभार किसी त्यौहार विशेष के मौके पर अपनी दया की सुंदरता मेसे थोड़ा सा प्यार अपने कालिदास को देकर इन्हे पति होने का अहसास भर कराती है. अपने मूर्ख कालिदास को ये अंग्रेजी में आई लव यू, डियर, माय लव कह कर इन्हें मॉडर्न कालिदास होने के लिए फिर से यह रिचार्ज कर देती हैं. इस प्रकार के मॉडर्न कालिदास आपको हर दूसरी और तीसरी घर में मिल जाएंगे.
यह सभी मॉडर्न कालिदास पत्नी का पैर दबाते हुए, किचन संभालते हुए, डांट खाते हुए, अपनी-अपनी गृहस्थ का "अभिज्ञान शाकुंतलम्" जी रहे. मैरिज एनिवर्सरी, करवा चौथ, 14 फरवरी, जैसे त्यौहार और पत्नी के ब्यूटी पार्लर ग्रस्त सजावट इनकी बुद्धि के सारे बल्ब फयूज कर देती है.उस दिन इन कालिदासो की बुद्धि विश्व के किसी भी मूर्ख से बहुत कम रह जाती है अर्थात इस दिन इन मॉडर्न कालिदासो कि आई क्यू न्यूनतम जीरो पर पहुंच जाती है.
यह अप्रैल मूर्खों का श्रेष्ठ महीना है, इसे पतझड़ के इर्द-गिर्द का महीना भी कह सकते हैं, जिन वृक्षों के पत्ते पतझड़ में गिर गए हो अगर उन्हें ध्यान से आप--5 मिनट तलक देखेंगे तो पाएंगे कि यह वृक्ष कोई और नहीं मुंह लटकाए हुए अकेले सिसक रहा मॉडर्न कालिदास है, जिसके सारी बाल बिल्कुल इन पत्तों की तरह झड़ गए हैं.
आइए इस अप्रैल हम तमाम महान मूर्ख कालिदासो के नाम पर एक राष्ट्रीय शोक सभा का आयोजन करें, जिसमें हम सभी मूर्ख कालिदास एक सुर में 10 मिनट तलक अपना मुँह और सर को किसी शोक में झुकाए गये झंडे की तरह लटका कर फूट-फूटकर अपनी पत्नी के द्वारा प्रतिवर्ष बनाए गए मूर्ख होने के दर्द को तरोताजा करे और इस अप्रैल से उस अप्रैल तक इस महान दुर्घटना के लिए चुने गये श्रेष्ठ कालिदास को हम सभी राष्ट्रीय कालिदास की गरिमा से बिभूषित करे.
यह व्यंग्य मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.
लेखक--रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर pin. 222002 (U P)
Mo. No. 7800824758
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