Tuesday, 24 March 2020

लोकसभा चुनाव--(चुनावी मूर्खता का महापर्व )

लोकसभा चुनाव--2019
(चुनावी मूर्खता का महापर्व)

चुनाव आते ही हमें भांति-भांति के मूर्ख दिखाई देते है. हमे भी श्रेष्ठ व उत्कृष्ट राजनैतिक मूर्खो को ढुढने के लिये बहुत गहन माथापच्ची नही करनी पड़ती. ये स्वमेव इस चुनावी बरसात मे आषाढ के खूबसूरत मेढक की तरह इस राजनैतिक स्वयंवर मे पौराणिक कथनानुसार नारद सा---"अपने को महा-खूबसूरत मान बैठते है अर्थात ये लोकतंत्र के ऐसे मूर्ख है जो खुद कहने से बाज नही आते कि हे सजनी---हमहूँ राजकुमार.
अभी पिछले चुनाव मे हमने अपनी पडोस मे रह रहे एक ऐसे किम-कर्तव्य विमुढ मूर्ख पति का अलौकिक दर्शन किया. जिसकी किस्मत मे--"ये राष्ट्रीय मूर्खता को जीने के अलावे कोई विकल्प ही नही".इसकी विपदा का महा-घनघोर कारण इसकी पत्नी का विजयी सांसद होना है.
पहले हालात ठीक थे फिर पत्नी रफ्ता-रफ्ता कर इस मूर्खता के हाईवे पे बढती चली गई और मै प्यार पाने वाले पति की जगह एक सांसद पत्नी की प्यार पाने वाला संविदा प्रजाति का पति बनके रह गया. अर्थात पत्नी की इस राजनैतिक मूर्खता ने मुझे अब मेरा परमानेंट प्यार नही बल्कि कभी-कभी अपने दया का वे ऐक्सिडेंटल मानदेय भर देती है.
अभी त्वरित एक और राष्ट्रीय मूर्खता से दो-चार होने वाला समाचार   टीवी पे सुनते ही मै मानसिक रुप से जैसे प्यार न पाने की पैरालाइसिस से गुजरा होऊं. इसका कारण वे मिसाइल रुपी टीवी ऐंकर का शब्द है जिसे अभी-अभी मेरे इन मनहूस कानो ने सुना है. मै इस 2019 की लोकसभा का वे चौबीस कैरेट का मूर्ख पति हूँ, जिसकी पत्नी को पार्टी ने अपना स्टार प्रचारक बनाया है. मै अपनी पत्नी की इस राजनैतिक मूर्खता को तब तक जिने को बाध्य हूँ जबतक कि ये लोकसभा का चुनाव पूर्ण नही हो जाता यानी की मै उसकी पार्टी के शपथ ग्रहण तक का कन्फर्म मूर्ख हूं.
सच तो ये है कि जिसे हम 2019 की लोकसभा का चुनाव कह रहे है वे लोकसभा का चुनाव नही अपितु राष्ट्रीय मूर्खता का एक महापर्व है. जो इस समय अपने चरम पे है और सभी छटे-छटाये मूर्ख तुफानी दौरे पे है आईये हम आप भी इस लोकतंत्र को मूर्ख समझने वाले को अपनी मतो से, उनकी वास्तविकता का उन्हें भान कराये.

@@@लेखक---रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर.pin no.222002(U P).
Mo.no.7800824758

यह लेख मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.

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