व्यंग्य---( हीरालाल की नाक )
मैंने महज़ अपनी 29 वर्ष की कम उम्र में ही तकरीबन 1500 से 2000 तरह की,बिभिन्न आकार-प्रकार की नाको को देखने और उसको भलीभांति समझने का घनघोर अध्ययन किया है. अतः इस आधार पर मैं खुद को निःसंकोच नाकों का एक कुशल और पहुंचा हुआ जानकार कह सकता हूं.
हमने अपनी इसी अध्ययन के दौरान अपनी कॉलोनी में हीरालाल जी की एक दुर्लभ नाक का भी साक्षात दर्शन किया है, यहां दुर्लभ मुझे इसलिए कहना पड़ रहा है कि, मैंने अब तलक जितने भी प्रकार की नाक को देखा है उनमें सबसे विचित्र नाक इन्हीं महाशय की है.
दरअसल हीरालाल जी की नाक इतनी नुकीली और लंबी है कि उतनी नुकिली और लंबी नाक मेरे ख्याल से पुरे भारत में दूसरी ढूढ़ पाना संभव नहीं है, अगर गलती से या सही में किसी व्यक्ति ने ऐसी दूसरी नाक हमारे देश में ढूंढ ली तो मैं निश्चित है कि ऐसे व्यक्ति को अपने देश में दुर्लभ नाक ढूंढ लेने का वास्कोडिगामा कहूंगा.
हीरालाल जी की नाक के साथ इतनी ही दुर्घटना नहीं जुड़ी है,बल्कि इसके साथ ही उनकी नाक कम से कम तीन जगह से इतनी विचित्र तरीके से मुड़ी हुई है कि लगता है जैसे उनकी नाक,नाक नहीं बल्कि किसी खूबसूरत प्लेट में,किसी ने बिना चाऊमीन के ही कांटे वाली चम्मच रख दी हो, सच एक तरह से उनके चेहरे का पूरा भूगोल इस नाक की नागफनी की वजह से, बिल्कुल ही खराब सा लगता है.
मैंने हीरालाल के नाक की इस दुर्लभ दुर्गति को और अच्छी तरीके से जानने और समझने के लिए, कॉलोनी के कुछ ऐसे लोगों से संपर्क कर पूछताछ की जिन्हें अक्सर दूसरों के बारे में खोद-निपोर करने में अत्यधिक आनंद की अनुभूति होती है. ऐसे ही लोगों से मुझे पता चला कि हीरालाल जी की नाक बचपन में ऐसी नहीं थी.दरअसल उनकी मां को किसी महिला ने, अपनी एक ऐसी गुप्त राय दी थी,जिसकी वजह से आज वर्तमान में हीरालाल अपनी नाक को लेकर पीड़ित और परेशान है.
वह महत्वपूर्ण राय यह थी कि,हीरालाल की माँ जब भी अपने हीरालाल की मालिश करे तो, कम से कम पूरे दिन में 6 से लेकर 8 बार,शुद्ध सरसों का तेल हीरालाल की नाक में डालकर उसे खूब अच्छी तरीके से खींचे, इससे हीरालाल कि नाक लंबी और देखने में खूबसूरत होगी अतः इस नुस्खे के तहत हीरालाल की मां ने हीरालाल की नाक को खींचना शुरू किया, और उसी का प्रतिफल हुआ की हीरालाल की नाक बड़े होने पर खूबसूरत तो ना हुई पर इतनी लंबी अवश्य हो गई, जिसकी वजह से उनकी शादी तक के लाले पड़ गए.
एक तरह से हीरालाल जी अपनी नाक को लेकर इतना ज्यादा परेशान हुए कि, उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के बताएं हुए डॉक्टर को दिखाने के लिए कॉलोनी में बिना किसी को बताए 15 दिन के लिए गायब हो गए, दरअसल हुआ यह कि उनके रिश्तेदार ने बताया था कि फला डॉक्टर प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा आपकी नाक को अन्य लोगों की नाक की तरह खूबसूरत बना देंगे.
हीरालाल जी ने अपने नाक की प्लास्टिक सर्जरी करवाने के बाद मय पट्टी के अपनी मुँह पर गमछा लपेटकर कॉलोनी लौटे, लौटने के बाद डॉक्टर ने उन्हें एक हफ्ते के बाद अपने नाक की पट्टी को खोल देने के लिए कहा था,और जिस दिन हीरालाल अपनी नाक की पट्टी को शीशे के सामने खड़े होकर खोल रहे थे उस दिन उनके हाथ बहुत ही तेजी से कांप रहे थे
ज्यों -ज्यों उन्होंने अपनी पट्टी खोली उनका मुंह पहले से कहीं ज्यादा लटकता जा रहा था, क्योंकि प्लास्टिक सर्जरी के बाद भी उनके नाक की सुंदरता में कोई भी सुधार नहीं हुआ अर्थात उनकी लंबी नाक अब देखने में किसी "जापानी नाक" की तरह दिखने लगी एक तरह से उनके नाक की दुर्गति दुर नहीं हुई बल्कि और बढ़ गई वे बेचारे कहा दूबे बनने गए थे और छब्बे बनके लौटे यानि कि एक तरह से हीरालाल जी की नाक मेंरे द्वारा देखी गई सबसे दुर्लभ नाक ही रही उनकी नाक में कोई सुधार या संशोधन नहीं हुआ, सिवा "जापानी नाक" के .
यह व्यंग्य मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.
लेखक-रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P )
Mo. no.7800824758
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