Wednesday, 19 May 2021

(बाँह मे मदिरा रही )
जब सभी ने छोड़ा मुझको--------------
तो हाथ मे मदिरा रही ।
हम तड़प के रो उठे,
कोई नही,कोई नहीं-------
बस साथ मे मदिरा रही ।
घर मेरा शमशान सा था,
और साँस मे मरघट मेरे ,
मै फिर भी  जिंदा रह गया ,
क्योंकि बिस्तर पे भी मेरे---
रात में मदिरा रही ।
रोजगाली ,रोज-नफरत 
है इसे जाने क्यों हासिल ?
ये वफा है,ये वफा है
बाकी दुनिया बेवफा है,
मै गिरा तो ये गिरी,
सब आते जाते रह गये,
उस राह मे भी साथ मेरे-----
बाँह मे मदिरा रही ।

@@@एक अलहदा टेस्ट की अलहदा रचना जो शायद आपको भी रास आये।

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