कहानी----(तु तु, मै मै )
हर दुसरे या तीसरे दिन मेरी पत्नी इंदु से "तु तु, मै मै" हों जाया करती थी, यह सब केवल मेंरे बचपन कि उस लापरवाह आदत की वजह से था जो की आज भी ज्यों की त्यों बरकरार है.बस फर्क इतना है की बचपन मे माँ से मेरी "तु तु, मै मै " होती थी अब पत्नी से हों रही है.
दरअसल मै जब आफ़िस से फ्लैट मे लौटता तो अपने सारे आवश्यक सामानो को इधर-उधर लापरवाही से फेक देता था, उसी को करिने से रखते हुए इंदु बीना मेरी तरफ देखकर गुस्से से भुंभूनाते हुए सारे सामानो को करिने से रख देती.फिर किचन मे जाकर वे मेंरे और अपने लिए चाय बना लाती.फिर जब हम दोनों चाय पीकर खाली होते तो मै उससे थोड़ी सी शरारत के लिए कहता कि सच इंदु जब तुम अक्सर गुस्से मे मुझसे "तु तु, मै मै" करती हों तो उस समय तुम मुझे बहुत ही खूबसूरत लगती हों.
मेरा यह प्यार यह शरारत जैसे इंदु को और चिढ़ा देता वे एक बार फिर मेरी तरफ गुस्से से देखकर अपने अन्य काम निपटाने चली जाती.ऐसे ही एक दिन आफ़िस कि छुट्टी होते ही मै सीढ़ियों से उतर रहा था, तो मेंरे पैर ना जाने कैसे उन सीढ़ियों से स्लिप कर गए, जिसकी वजह से मै तीन-चार सीढियां फीसलता हुआ नीचे आ गिरा, फिर उठने कि कोशिश की तो उठ नही पा रहा था.
तभी सीढ़ियों से उतर रहे मेंरे आफ़िस के अन्य सहकर्मियों ने दौड़कर मुझे उठाया, ना सिर्फ उठाया बल्कि मुझे आफ़िस के बगल मे सड़क के उस तरफ बने हड्डी के अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया भी.इसी बीच किसी सहकर्मी ने मेरी पत्नी इंदु को भी फोन कर दिया था, वे भी पंद्रह मिनट के अंदर अस्पताल आ गई, मुझे देखकर रोते हुए बोली क्या हुआ जी आपको.
अरे कुछ नही इंदु बस यू ही थोड़ी सी पैर मे चोट आ गई बस, तभी डॉक्टर मेरी बेड के पास आये और पुछा आराम तो है ना, जी आराम है डॉक्टर साहब अब पैर मे दर्द भी नही हों रहा. इंदु ने इसी बीच मौका पाकर पुछा कि क्या हुआ इन्हें डॉक्टर साहब. तो डॉक्टर ने कहा आप, तो इंदु ने कहा की जी मै इनकी वाइफ हूं.
तो डॉक्टर ने इंदु से कहा कि इन्हें कुछ भी नही हुआ है बस पैर मे थोड़ी सी मोच है, जिसके लिए मै कुछ दवाए और इनके पैर कि मालिश के लिए मलहम दे दे रहा हूं जिससे आप दिन मे तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को मालिश करने के बाद पैर को हल्के गुनगुने पानी से सेक दिया करें और हा एक बात और इनको कम से कम पंद्रह दिन पुरी तरह से बेड रेस्ट करना है.
फिर इंदु के साथ मै अपने फ्लैट पर आ गया, इस बीच इंदु ने मेंरे बीस्तर को करिने से लगाकर आफ़िस के कपड़े को चेंज कर आराम दायक कपड़े पहना दिये फिर इसी तरह इंदु ने दिन-रात एककर मेरी इतनी सेवा कि की मै पुनः पहले की तरह ठीक हों गया.हा इस बीच मैंने नोट किया कि जैसे इंदु मुझे भूनभूनना और मुझसे "तु तु, मै मै" करना भूल गई थी.लेकिन इन पंद्रह दिनों के बेड रेस्ट ने मुझे भलीभांति यह एहसास करा दिया कि आखिर क्यों मेरी वजह से इंदु अक्सर गुस्से मे मुझे,भुंभूनाया करती थी.
दरअसल वे एक सुबह से काम पर लगती तो कही दोपहर मे थोड़ी बहुत खाली हो पाती थी,फिर एकाध घंटे बाद ही वे अपने शाम के कामों मे लग जाती एक मै था जिसने इंदु को कौन कहे सहयोग करने के मै उसके लिए काम अलग से बढ़ाए रहता आज मुझे एहसास हों रहा था कि आखिर क्यो बचपन मे मेरी माँ और अब इंदु मुझसे भुंभूनाया करती थी या मुझसे "तु तु, मै मै" किया करती थी.
यही सब याद करते हुए मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे और मैंने इंदु को अपने पास बुलाया तो इंदु मुझे इस तरह रोता हुआ देखकर घबरा गई बोली क्या हुआ जी आपको? कोई तकलीफ है क्या?मैंने अपनी गरदन हिलाते हुए कहा नही,फिर मैंने इंदु को अपने गले से लगा लिया और कुछ देर बाद बोला कि इंदु क्या तुम अब मुझसे पहले कि तरह गुस्से मे नही भुंभूनाओगी,मुझसे "तु तु, मै मै" नही करोगी तो इंदु बोली नही जी मै अब आपसे कभी भी "तु तु, मै मै" नही करूंगी क्योंकि मुझे ऐसा लगता है मेंरे इसी "तु तु, मै मै" कि वजह से ही आपके पैर मे चोट आई थी .
सच शायद एक औरत का यही वात्सल्य कि वे अब भी अपने को ही दोषी मान रही थी , ऐसे ही बचपन मे जब मेरी तबीयत खराब हुआ करती थी तब माँ भी अपने आपको ही दोषी माना करती थी लेकिन आज मै वाकई पश्चातप करना चाहता था, इसलिए मैंने इंदु से कहा प्लीज इंदु तुम मुझे माफ कर दो सच मैंने तुमको बहुत परेशान किया है, फिर इंदु भी रों उठी और बोली नहीं जी आप ऐसा क्यूं कह रहे है, फिर मैंने अपनी हाथों से इंदु के आँसू पोछे फिर हम दोनों एक साथ काफी देर तक मुस्कुराते रहे.
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