Thursday, 20 May 2021

(घर की दहलीज़ रोई)
 तुम किसी गैर औरत की आगोश में लेटे रहे,
वे इंतज़ार के दिये की तरह,
अपने अंदर तक भिग रोई।
तेरी बेवफ़ाई को तो एक आवारा निद आई,
मगर यहां वफ़ा अपनी आँख मे आँसू लिये,
तकती रही तेरा रास्ता----------
एै"रंग" उसके संग केवल पुरी रात,
तेरे घर की दहलीज़ रोई।

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