Rangnath Dubey's Poems
Monday, 31 May 2021
(फिराक हो पीते थे)
तुम्हें पंडित और मौलवी---
पाक़ हो पीते थे.
ऐ शराब ----
ये तेरी खुश-नशीबी नहीं,
तो क्या है??
कि तुम्हें तमाम शायर ,
गालिब और ---
फिराक हो पीते थे.
@@रंगनाथ द्विवेदी
## 7800824758
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