इसकी pdf भेजनें के लिए दैनिक जागरण के ऊर्जा कालम व साथ ही बिभिन्न हिंदी साहित्य विधा के चर्चित हस्ताक्षर प्रिय भाई पुष्पेंद्र दीक्षित का बहुत-बहुत धन्यवाद 🌹🌹🌹🌹
बाल दिवस लघुकथा----( गलती क्या थी? )
मुझे ट्रेन में बैठकर , जौनपुर से फैजाबाद जाना था, लेकिन प्लेटफार्म के लगे माइक से लगातार यह अनाउंस हो रहा था कि, आज जौनपुर से फैजाबाद जाने वाली ट्रेन अपने निर्धारित समय से एक घंटे लेट से आएगी.
यह जानकर मैं प्लेटफार्म से बाहर निकल आया और यूं ही चाय पीने की नियत से एक चाय की दुकान पर जा बैठा, तभी उस दुकान में बैठे सात-आठ लोगों के बीच से एक आवाज आई कि - "ए चवन्नी तीन चाय लाना तो."
उनके बुलाने के तरीके से यह स्पष्ट लग रहा था कि, वे यहीं कहीं आसपास के रहने वाले थे. फिर तीनों सिगरेट जला कर आपस में बातें कर खूब खिलखिला कर हंसने लगे. तभी उन लोगों के हंसने के बीच एक 13 साल के लड़के जो कि मैले-कुचैले निक्कर के साथ एक दो जगह से फटी गंजी पहने था आया.
उन लोगों के सिगरेट के धुंए की वजह से या कहीं पांव में ठोकर लग जाने की वजह से उस चवन्नी के हाथ से चाय की पकड़ी हुई गिलास छूटकर उन लोगों के साफ-सुथरे कपड़े पर गिर जाता है. जिसकी वजह से उस मासूम से दिखने वाले चवन्नी नाम के लड़के को ना सिर्फ ये मां बहन की गाली देते हैं, बल्कि उसके गाल पर तीन-चार तमाचे भी जड़ देते हैं.
क्योंकि मैं भी उसी चाय की दुकान पर बैठा चाय पी रहा था. अतः मैंने साफ व स्पष्ट उस चवन्नी की आँखों में भर आये आँसुओं को देखा और मेरा मन खिन्न हो उठा, फिर मै चाय के पैसे दे, स्टेशन के प्लेटफार्म की तरफ चल पड़ा जहां मेरे जाने वाली ट्रेन के प्लेटफार्म नंबर 4 पर लगने का अनाउंस हो रहा था. लेकिन एक सवाल जो ट्रेन से मेरे गंतव्य तलक पहुंचने के बावजुद भी अनुत्तरित रह गया. वह था कि, -- "आखिर उस चवन्नी नाम के लड़के की गलती क्या थी?"
लेखक---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
Mo.no.7800824758
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