Tuesday, 8 November 2022

(दंगा याद है)
हमें पुराना शहर याद है,
एक-एक गली मुहल्ला याद है।
वे कुर्आनखानी का खुरमा,
मुँह पोछती अपने दुपट्टे से,
अब्दुल की अम्मा याद है।
हमें पुराना शहर याद है!
राखी सुनि थी एक ब्राह्मन के घर,
आँख मे खुशियो के आँसू---------
मेरी इस कलाई को सलमा याद है।
हमें पुराना शहर याद है!
इतने सालों बाद देखा जब जला घर,
पुछा कहां गये ये सब,
तो नये शहर के बाशिंदो ने बताया,
तो अफसोस हुआ,रंग---------------
कि अब नये शहर को,
पुराने शहर की मोहब्बत नही,
नफरत,लाशे और दंगा याद है।
हमें पुराना शहर याद है।

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