Saturday, 5 November 2022

(शहनाज़ का मेकप नही करती)
हमारी गज़ल वे खूबसूरत औरत है,
जो कभी शहनाज़ का मेकप नही करती।
वे सादगी और सलिके की रस्म़ है,
वे जिधर से गुजरती है निगाहे पाकिज़ा,
अपने सर से दुपट्टे को ओझल नही करती।
हमारी गज़ल--------------------
ये जीनत है ज़मी की आयत है,
ये ज़न्नत से घर को कभी दोज़ख नही करती।
हमारी गज़ल-----------------------
ऐ,रंग----इसकी दुनिया फकत शौहर है,
ये हवस के मारो की तरह कभी ब्रेकप नही करती।

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