Rangnath Dubey's Poems
Friday, 4 November 2022
(प्रेम कस्तुरी)
उससे दुर हूँ-----------
फिर भी नही है उससे कोई दुरी।
मेरे कानो मे सुनाई देती है-----
उसकी वे संगीतमय चुड़ि।
मेरी प्रेयसी बस कहने को प्रेयसी है,,
वरना ऐ,रंग----वे है मेरे हृदय की----
प्रेम कस्तुरी।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment