Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 20 November 2022
(चिनार की शाखों पे)
बैठता है,आज भी
यादो का परिंदा
चिनार की शाखो पे।
लगता है,आज भी हमे
कि,वे चुपके से
मेरे पीछे खड़ी हो,
ऐ रंग,-रख देगी अपनी
नर्म अगुँलियाँ,
मेरी आँखो पे।
बैठता है,आज भी
यादो का परिंदा
चिनार की शाखो पे।
चिनार-एक पहाड़ी वृक्ष।
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