Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 13 July 2023
(सुकरात को भी जहर दे दो)
(सुकरात को भी ज़हर दे दो)
गर सच की ज़ुबां को
खामोश़ करना है,
तो ए,"रंग"
इस कलम के
"सुकरात" को भी---
ज़हर दे दो
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