Saturday, 29 July 2023

(सखी हे!रे बदरवा)

बारिश ने अचानक से रोमांटिक कर दिया😎😎

       (सखी!हे रे बदरवा)

तन मन भिगोए सखी! हे रे बदरवा
करे छेड़खानी मोहे छेड़े बदरवा.

सिहर-सिहर जाऊँ शरमाऊँ इत-उत,
मोहे पिया की तरह सखी!घेरे बदरवा.

तन-मन भिगोए सखी! हे रे बदरवा.

चुंबन पर चुंबन की है झड़ी,
बूंद-बूंद चुंबन सखी!ले रे बदरवा.

तन-मन भिगोए सखी!हे रे बदरवा.

अंखियों को खोलू अंखियों को मूंदु
जैसे मेरी अंखियों में कुछ सखी! ढुढ़े बदरवा.

तन-मन भिगोए सखी! हे रे बदरवा.

मेरी यौवन का आंचल छत पर गिरा,
मेरी रुप का पढ़े मेघदुतम सखी! हे रे बदरवा.

तन-मन भिगोए सखी हे रे बदरवा.

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)

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