Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 23 July 2023
(वे गूंगी नही)
(वे गुँगी नही)
तुम जीसे कहते हो गुँगी----------
वे अक्सर मेरी गज़लो मे ढ़लती है,,,,,,,,,,,
वे थिरकती है जब पाँव में बाँध के घूँघरु-
तो कितना बोलती है,,,,,,,,,,,
ऐ,रंग---वे गुँगी नही------------
एक मासूम लड़की है।
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