Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 24 April 2024
(पत्थर की अहिल्या)
(पत्थर की अहिल्या)
हाँ मैने देखी है इस शहर में------
एक पत्थर की अहिल्या।
बस फर्क ये है----------
उस दौर और इस दौर की अहिल्या में,
तब इसे राम ने उबारा था---------
और अब!
इसे राम ने ही छल लिया।
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