(हिना )
उफ़ ! जा नहीं पाई
इस फानी दुनिया से
तेरे संग "हिना ".
अब रोएगी सीसकेगी
तेरी याद में
हर लम्हें, हर रोज,
पर लिख नही पायेगी
फिर से हथेली पे
तुम्हारा नाम----
ये तुम्हारी "हिना ".
देख तेरी नीतू--
नीतू ना रही,
उफ़ ! बनके रह गयी,
एक औरत से---
बदरंग "हिना ".
रंगनाथ द्विवेदी
जौनपुर (उत्तर-प्रदेश )
Mo.no.7800824758
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